चालदा महासू महाराज का प्रवास: देहरादून के दसऊ से हिमाचल के पश्मी गांव की यात्रा शुरू..

जौनसार बावर के दसऊ मंदिर से छत्रधारी चालदा महासू महाराज की हिमाचल प्रदेश के पश्मी गांव के लिए यात्रा शुरू हो गई है। हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा के साक्षी बन रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पश्मी और द्राबिल गांव से आए ग्रामीणों का जोरदार स्वागत किया गया। छह दिवसीय प्रवास यात्रा में देवता सातवें दिन पश्मी गांव के नए मंदिर में विराजमान होंगे। सिरमौर जिले में देवता का प्रथम पदार्पण होने से श्रद्धालुओं में खुशी है।



उद्योग मंत्री दसऊ में आयोजन में शिरकत करते ने कहा कि पश्मी शिलाई क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पल का आगाज शुरू हो गया है, जिसका पिछले पांच वर्ष से इंतजार था।

जौनसार बावर के दसऊ मंदिर में विराजमान छत्रधारी चालदा महासू महाराज की अगले प्रवास हिमाचल प्रदेश के पश्मी के लिए यात्रा शुरू हो गयी है। मुलूक छत्रधारी की ऐतिहासिक यात्रा के हजारों श्रद्धालु गवाह बन रहे हैं।

हिमाचल के पश्मी व द्राबिल गांव से साढ़े तीन सौ ग्रामीण देवता को लेने के लिए दसऊ गांव पहुंचे हैं। जिनका खत दसऊ पसगांव के ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।

छत्रधारी चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा छह दिवसीय होगी। छह रात्रि पड़ाव होंगे और सातवें दिन देवता हिमाचल के सिरमौर के पश्मी गांव में बनाए गए भव्य नए मंदिर में विराजमान हो जाएंगे।


भ्रमण प्रिय छत्रधारी चालदा महासू महाराज चार भाई महासू में सबसे अनुज हैं। टोंस पार सिरमौर में छत्रधारी चालदा महासू महाराज का प्रथम पदार्पण होगा, जिस कारण सिरमौर जिले के श्रद्धालुओं में विशेष खुशी दिखाई दे रही है।

यात्रा स्वर्णिम है, क्योंकि छत्रधारी चालदा महासू महाराज इससे पूर्व कभी सिरमौर में प्रवास के लिए नहीं गए हैं। वह अपनी पालकी में विराजमान होकर सिरमौर के भक्तों को दर्शन देने आ रहे हैं।

सिरमौर के लिए यह क्षण सैकड़ों वर्षों का इंतजार और परम सौभाग्य का विषय है। छत्रधारी चालदा महाराज चलायमान देवता हैं। वह किसी एक स्थान पर स्थिर न रहकर प्रत्येक क्षेत्र का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों के दु:ख दूर करते हैं। छत्रधारी अपने भ्राताओं द्वारा प्रदत्त एक विशालकाय दिव्य छत्र को धारण करते हैं।

सोमवार को शुभ मुहूर्त में गर्भगृह से देवता जब बाहर आए तो देवदर्शन को श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ा, हर कोई अपने आराध्य देव के दर्शन को व्याकुल दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर मन्नतें मांगी।


कहीं खुशी तो कहीं मायूसी

साहिया: जैसे ही चालदा देवता गर्भगृह से बाहर आए। प्रवास यात्रा शुरू हुई तो दसऊ गांव में पहुंचे श्रद्धालु भावुक हो गए। महिलाएं अपने आराध्य के प्रवास पर हिमाचल जाने को देखते हुए रोने लगी।

जिससे यहां पर मायूसी दिखाई दी और हिमाचल के पश्मी गांव में देवता के आने को लेकर खुशी रही। हालांकि चालदा देवता प्रवास यात्रा शुरू होने के बाद आठ दिसंबर को दसऊ में रात्रि विश्राम होगा।

10 दिसंबर को सीताराम चौहान भूपऊ, 11 दिसंबर को म्यार खेड़ा, 12 दिसंबर को सावड़ा में बुरायला जगथान की बागड़ी होगी। जिसके बाद 13 दिसंबर को द्राबिल हिमाचल प्रदेश में बागड़ी।

सिरमौर में अंतिम पड़ाव होगा, जिसके बाद 14 दिसंबर को पश्मी मंदिर में एक वर्ष के लिए विराजमान होंगे। शांठीबिल और पांशीबिल के आराध्य छत्रधारी चालदा महासू महाराज के इस ऐतिहासिक सिरमौर प्रवास में तीस हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।


फूल मालाओं से किया स्वागत

साहिया: खत दसऊ पशगांव के दसऊ गांव स्थित विराजमान छत्रधारी चालदा महाराज के झोझोडियो के स्वागत के लिए दसऊ खत के ग्रामीण मुख्य गेट पर फूल मालाओं के साथ खड़े रहे। जिन्होंने हिमाचल प्रदेश के शिलाई क्षेत्र के पश्मी व द्राबिल गांवों के साढ़े तीन सौ लोग दसऊ गांव पहुंचे।

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