भारतीय सेना की कुमाऊं कार रैली संपन्न, पर्यटन को बढ़ावा देना रहा उद्देश्य, वाइब्रेंट विलेज से भी जुड़े

सेना ने कहा सीमावर्ती गांव देश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं.

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और विकास की संभावनाओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित भारतीय सेना की कुमाऊं कार रैली पिथौरागढ़ में संपन्न हो गई. भारतीय सेना ने रेनॉल्ट इंडिया के सहयोग और मेवरिक के मीडिया पार्टनर के रूप में इस रैली का आयोजन किया.

भारतीय सेना की कार रैली संपन्न: यह रैली 15 सितंबर को बरेली से शुरू हुई थी. रैली को लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, एवीएसएम, जीओसी उत्तर भारत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. एक सप्ताह तक चली रैली ने पिथौरागढ़ से धारचूला, गुंजी, लिपुलेख, ओम पर्वत, कालापानी और आदि कैलाश तक की यात्रा की. इस दौरान प्रतिभागियों ने कुमाऊं के सीमांत क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक महत्व और वहां की जीवनशैली को करीब से जाना.

कुमाऊं कार रैली में ये लोग थे शामिल: रैली में पंचशूल गनर्स के 10 जवानों के अलावा पूर्व सैनिक, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और उद्यमी शामिल हुए. दल ने दुर्गम सीमावर्ती गांवों में पहुंचकर स्कूली बच्चों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया. इस दौरान युवाओं को सशस्त्र सेनाओं में शामिल होकर राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया गया. सेना के जवानों ने सीमाओं पर तैनात सैनिकों की भूमिका और देशसेवा की भावना से भी युवाओं को परिचित कराया.

ये था सेना की कार रैली का उद्देश्य: रैली का एक प्रमुख उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों को साहसिक और आध्यात्मिक पर्यटन के नए गंतव्य के रूप में सामने लाना रहा. आदि कैलाश, ओम पर्वत, लिपुलेख और काली घाटी जैसे क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया. सेना की इस पहल के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए होमस्टे, परिवहन, गाइड, स्थानीय उत्पाद और अन्य सेवाओं के जरिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. इससे गांवों से पलायन रोकने और लोगों को वापस अपने गांवों में बसने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है.

कार रैली को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से भी जोड़ा गया: कुमाऊं कार रैली को केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के उद्देश्यों से भी जोड़ा गया. कार्यक्रम का जोर सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, वहां आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने और स्थानीय आबादी को गांवों में बनाए रखने पर है. रैली के दौरान कुमाऊं की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने रखने के साथ सेना और सीमांत समुदायों के बीच संपर्क को भी मजबूत करने का प्रयास किया गया.

सेना के अधिकारियों ने कही ये बात: सेना के अधिकारियों का कहना है कि कुमाऊं कार रैली ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सीमावर्ती गांव केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा के अंतिम छोर पर बसे गांव ही नहीं हैं, ये क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं. इस रैली की विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सराहना की है.